Ration Card E kyc: भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का आधार राशन कार्ड है, जो गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सस्ती कीमत पर खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुएं प्रदान करने के लिए सरकार का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। हाल के वर्षों में, डिजिटल इंडिया पहल के तहत, इस महत्वपूर्ण व्यवस्था में कई तकनीकी सुधार किए गए हैं। इन सुधारों में सबसे महत्वपूर्ण है राशन कार्ड की ई-केवाईसी (इलेक्ट्रॉनिक-नो योर कस्टमर) प्रक्रिया, जिसने न केवल सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाया है, बल्कि भ्रष्टाचार और लीकेज को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के अंतर्गत, सरकार ने राशन कार्ड को आधार से जोड़ना अनिवार्य किया है और इसके लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया को लागू किया है। यह कदम न केवल राशन वितरण प्रणाली को अधिक कुशल बनाता है, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी सब्सिडी का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक ही पहुंचे। इस लेख में हम ई-केवाईसी की प्रक्रिया, इसके महत्व, और इसे पूरा करने के विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
राशन कार्ड ई-केवाईसी का महत्व और उद्देश्य
राशन कार्ड ई-केवाईसी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना और फर्जी राशन कार्डों के माध्यम से होने वाले धोखाधड़ी को रोकना है। इसके अंतर्गत, राशन कार्डधारकों का आधार पर आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि राशन का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक ही पहुंचे।
ई-केवाईसी के माध्यम से, सरकार को यह जानने में मदद मिलती है कि कौन से परिवार वास्तव में राशन सब्सिडी के पात्र हैं और कौन से नहीं। इससे राशन कार्ड की डुप्लिकेसी, मृत व्यक्तियों के नाम पर राशन लेने की प्रथा, और एक से अधिक राज्यों में एक ही व्यक्ति द्वारा राशन कार्ड रखने जैसी समस्याओं पर रोक लगती है। यह प्रक्रिया ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ योजना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिसके तहत कोई भी राशन कार्डधारक देश के किसी भी हिस्से में अपने कोटे का राशन प्राप्त कर सकता है।
इसके अलावा, ई-केवाईसी से सरकार को सटीक डेटाबेस बनाने में मदद मिलती है, जिसके आधार पर भविष्य की नीतियां और योजनाएं तैयार की जा सकती हैं। यह प्रणाली राशन वितरण में होने वाले भ्रष्टाचार को कम करने में भी सहायक है, क्योंकि इसमें बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से लाभार्थी की पहचान सुनिश्चित की जाती है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और ई-केवाईसी का संबंध
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), 2013 भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण क़ानून है। इस कानून के तहत, देश की लगभग दो-तिहाई आबादी को रियायती दरों पर खाद्यान्न प्राप्त करने का अधिकार है। इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए, सरकार ने ई-केवाईसी को अनिवार्य किया है।
एनएफएसए के अंतर्गत, राशन कार्ड तीन श्रेणियों में विभाजित किए गए हैं – अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) कार्ड, प्राथमिकता वाले परिवार (पीएचएच) कार्ड, और गैर-प्राथमिकता वाले परिवार कार्ड। ई-केवाईसी प्रक्रिया इन सभी श्रेणियों के लिए अनिवार्य है।
ई-केवाईसी के माध्यम से, एनएफएसए के लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन किया जाता है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि अधिनियम के अंतर्गत मिलने वाले लाभों का वितरण सही लोगों तक हो। इसके अलावा, ई-केवाईसी से डेटाबेस का निरंतर अपडेशन होता है, जिससे सरकार को यह पता चलता है कि कितने परिवार वास्तव में योजना का लाभ उठा रहे हैं और कहां सुधार की आवश्यकता है।
ई-केवाईसी प्रक्रिया के चरण और आवश्यक दस्तावेज
राशन कार्ड ई-केवाईसी एक सरल प्रक्रिया है, जिसे निम्नलिखित चरणों में पूरा किया जा सकता है:
पहला चरण है राशन कार्ड और आधार कार्ड को एक-दूसरे से लिंक करना। इसके लिए राशन कार्डधारक को अपना आधार नंबर और राशन कार्ड नंबर प्रदान करना होता है। यह लिंकिंग ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से की जा सकती है।
दूसरा चरण है बायोमेट्रिक सत्यापन, जिसमें राशन कार्डधारक के फिंगरप्रिंट या आइरिस स्कैन के माध्यम से उनकी पहचान सत्यापित की जाती है। हाल ही में, फेस रिकग्निशन तकनीक को भी सत्यापन के लिए शामिल किया गया है, जिससे प्रक्रिया और भी सरल हो गई है।
तीसरा चरण है परिवार के सभी सदस्यों का सत्यापन। राशन कार्ड में शामिल प्रत्येक सदस्य का ई-केवाईसी करना आवश्यक है। यदि कोई सदस्य अनुपस्थित है या बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं कर सकता, तो विशेष परिस्थितियों में अपवाद की अनुमति दी जाती है।
ई-केवाईसी प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेजों में शामिल हैं:
- राशन कार्ड (मूल प्रति)
- आधार कार्ड (परिवार के सभी सदस्यों का)
- मोबाइल नंबर (आधार से लिंक)
- पासपोर्ट साइज फोटो (कुछ राज्यों में आवश्यक)
- पहचान का कोई अन्य प्रमाण (जैसे वोटर आईडी, पैन कार्ड आदि) जो कुछ स्थानों पर वैकल्पिक रूप से मांगा जा सकता है
ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, लाभार्थी को एक पुष्टिकरण मिलता है, जिसे भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रखना चाहिए।
ऑनलाइन ई-केवाईसी: घर बैठे पूरा करें प्रक्रिया
आधुनिक तकनीक के युग में, सरकार ने राशन कार्डधारकों के लिए ऑनलाइन ई-केवाईसी की सुविधा प्रदान की है। इससे लाभार्थियों को राशन कार्यालय या उचित मूल्य की दुकान (फेयर प्राइस शॉप) जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, और वे घर बैठे ही यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
ऑनलाइन ई-केवाईसी के लिए, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की आधिकारिक वेबसाइट nfsa.gov.in का उपयोग किया जा सकता है। इस वेबसाइट पर जाकर, उपयोगकर्ता अपने राज्य का चयन कर सकता है और फिर ई-केवाईसी विकल्प पर क्लिक कर सकता है। यहां उन्हें अपना राशन कार्ड नंबर, आधार नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा।
आधार नंबर पर लिंक मोबाइल पर एक ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) भेजा जाता है, जिसे दर्ज करने पर आगे की प्रक्रिया शुरू होती है। फिर, उपयोगकर्ता को अपने स्मार्टफोन के कैमरे का उपयोग करके फेस रिकग्निशन के माध्यम से अपनी पहचान सत्यापित करनी होती है। इसके लिए स्मार्टफोन में कैमरा और इंटरनेट कनेक्शन होना आवश्यक है।
कुछ राज्यों में, ऑनलाइन ई-केवाईसी के लिए स्थानीय भाषाओं में विशेष पोर्टल भी विकसित किए गए हैं। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु में tnpds.gov.in, उत्तर प्रदेश में fcs.up.gov.in, और महाराष्ट्र में mahafood.gov.in जैसी वेबसाइट्स का उपयोग किया जा सकता है।
ऑनलाइन ई-केवाईसी की प्रक्रिया सामान्यतः 10-15 मिनट में पूरी हो जाती है, और सफल सत्यापन के बाद, लाभार्थी को एक पुष्टिकरण संदेश या प्रमाणपत्र प्राप्त होता है।
‘मेरा राशन 2.0’ और ‘मेरा ई-केवाईसी’ ऐप्स: मोबाइल से करें ई-केवाईसी
डिजिटल इंडिया पहल के तहत, सरकार ने राशन कार्ड से संबंधित सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाने के लिए मोबाइल ऐप्लिकेशन विकसित किए हैं। ‘मेरा राशन 2.0’ और ‘मेरा ई-केवाईसी’ जैसे ऐप्स ने ई-केवाईसी प्रक्रिया को और भी सरल बना दिया है।
‘मेरा राशन 2.0’ एक व्यापक ऐप है जो न केवल ई-केवाईसी की सुविधा प्रदान करता है, बल्कि राशन कार्ड से संबंधित अन्य सेवाएं भी प्रदान करता है। इस ऐप के माध्यम से, उपयोगकर्ता अपने राशन कार्ड की स्थिति देख सकते हैं, नजदीकी राशन दुकानों का पता लगा सकते हैं, अपने मासिक राशन की पात्रता की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, और ई-केवाईसी भी कर सकते हैं।
ई-केवाईसी करने के लिए, उपयोगकर्ता को ऐप में अपना राशन कार्ड नंबर और आधार नंबर दर्ज करना होता है। फिर, ऐप उन्हें ओटीपी के माध्यम से या फेस रिकग्निशन तकनीक का उपयोग करके सत्यापित करता है। फेस रिकग्निशन विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनके फिंगरप्रिंट स्पष्ट नहीं हैं या जिन्हें बायोमेट्रिक सत्यापन में समस्या होती है।
‘मेरा ई-केवाईसी’ ऐप विशेष रूप से ई-केवाईसी प्रक्रिया के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ऐप उपयोगकर्ता के लिए एक सरल और सीधा इंटरफेस प्रदान करता है, जहां वे अपना राशन कार्ड नंबर, आधार नंबर, और मोबाइल नंबर दर्ज करके ई-केवाईसी कर सकते हैं। ऐप में ओटीपी सत्यापन के बाद, उपयोगकर्ता अपने चेहरे का स्कैन करके अपनी पहचान सत्यापित कर सकते हैं।
ये ऐप्स गूगल प्ले स्टोर और ऐप स्टोर से निःशुल्क डाउनलोड किए जा सकते हैं और अधिकांश भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं, जिससे उनका उपयोग आसान हो जाता है। ये ऐप्स विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए फायदेमंद हैं, जहां राशन कार्यालय तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
ऑफलाइन ई-केवाईसी: राशन दुकान या केंद्र पर जाकर करें प्रक्रिया
हालांकि ऑनलाइन और मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-केवाईसी की सुविधा उपलब्ध है, फिर भी कई लोग तकनीकी सीमाओं, इंटरनेट की अनुपलब्धता, या डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण इन विकल्पों का उपयोग नहीं कर पाते। ऐसे लोगों के लिए, सरकार ने ऑफलाइन ई-केवाईसी की व्यवस्था भी की है।
ऑफलाइन ई-केवाईसी के लिए, राशन कार्डधारक को अपने नजदीकी उचित मूल्य की दुकान (फेयर प्राइस शॉप), जनसेवा केंद्र, या राशन कार्यालय जाना होता है। वहां उन्हें अपना राशन कार्ड, आधार कार्ड, और अन्य आवश्यक दस्तावेज ले जाने होते हैं।
दुकान या केंद्र पर, एक विशेष डिवाइस के माध्यम से लाभार्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाता है। इसमें फिंगरप्रिंट स्कैनिंग, आइरिस स्कैनिंग, या फेस रिकग्निशन शामिल हो सकता है। इस प्रक्रिया में, राशन कार्ड में शामिल सभी सदस्यों का सत्यापन किया जाता है।
ऑफलाइन ई-केवाईसी का एक लाभ यह है कि इसमें तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए सहायता उपलब्ध होती है। अगर कोई लाभार्थी बायोमेट्रिक सत्यापन में समस्या का सामना करता है, तो केंद्र के कर्मचारी उसे वैकल्पिक विकल्प प्रदान कर सकते हैं या समस्या के समाधान में मदद कर सकते हैं।
कई राज्यों में, ऑफलाइन ई-केवाईसी के लिए विशेष शिविर भी आयोजित किए जाते हैं, जहां एक निश्चित समय अवधि के भीतर अधिक से अधिक लोगों का सत्यापन किया जा सके। ये शिविर विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में आयोजित किए जाते हैं, जहां डिजिटल सुविधाएं सीमित हैं।
ई-केवाईसी से होने वाले लाभ और उसके प्रभाव
राशन कार्ड ई-केवाईसी प्रक्रिया के कई लाभ हैं, जो न केवल लाभार्थियों बल्कि पूरी सार्वजनिक वितरण प्रणाली को प्रभावित करते हैं:
पहला और सबसे महत्वपूर्ण लाभ है पारदर्शिता में वृद्धि। ई-केवाईसी के माध्यम से, सरकार के पास एक सटीक डेटाबेस होता है जिससे यह पता चलता है कि कौन वास्तव में राशन के पात्र हैं और कौन नहीं। इससे फर्जी राशन कार्डों और गलत तरीके से लाभ उठाने वालों की पहचान करना आसान हो जाता है।
दूसरा लाभ है सब्सिडी लीकेज में कमी। पहले, कई बार राशन का गलत हाथों में जाना, बिचौलियों द्वारा धोखाधड़ी, और फर्जी पहचान के माध्यम से लाभ उठाना आम था। ई-केवाईसी ने इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया है।
तीसरा लाभ है ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ योजना का सफल क्रियान्वयन। ई-केवाईसी के माध्यम से, एक राशन कार्डधारक देश के किसी भी हिस्से में अपना राशन प्राप्त कर सकता है, जो प्रवासी मजदूरों और अन्य लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है।
चौथा लाभ है डिजिटलीकरण से सेवा वितरण में सुधार। ई-केवाईसी के माध्यम से, राशन वितरण प्रक्रिया तेज और अधिक कुशल हो गई है। लाभार्थियों को लंबी कतारों में खड़े होने या अनावश्यक कागजी कार्रवाई से गुजरने की आवश्यकता नहीं होती।
इसके अलावा, ई-केवाईसी ने सरकार को बेहतर नीति निर्माण में मदद की है। सटीक डेटा के आधार पर, सरकार यह निर्धारित कर सकती है कि कहां और किस प्रकार के सुधार की आवश्यकता है, और कौन से क्षेत्र या समूह विशेष ध्यान देने के पात्र हैं।
ई-केवाईसी प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियां और उनका समाधान
हालांकि ई-केवाईसी ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़े सुधार किए हैं, फिर भी इस प्रक्रिया में कुछ चुनौतियां हैं जिन्हें संबोधित करने की आवश्यकता है:
पहली चुनौती है तकनीकी बाधाएं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या, बिजली की कमी, या डिजिटल उपकरणों की अनुपलब्धता ई-केवाईसी प्रक्रिया में बाधा डाल सकती है। इस समस्या के समाधान के लिए, सरकार ने ऑफलाइन ई-केवाईसी की व्यवस्था की है और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष शिविर आयोजित करती है।
दूसरी चुनौती है डिजिटल साक्षरता की कमी। कई लाभार्थी, विशेष रूप से बुजुर्ग और कम शिक्षित लोग, तकनीकी उपकरणों और प्रक्रियाओं से परिचित नहीं होते। इसके लिए, सरकार ने जागरूकता अभियान चलाए हैं और सहायता केंद्र स्थापित किए हैं जहां लोगों को ई-केवाईसी प्रक्रिया के बारे में बताया जाता है और उनकी मदद की जाती है।
तीसरी चुनौती है बायोमेट्रिक सत्यापन में तकनीकी समस्याएं। कई लोगों, विशेष रूप से शारीरिक श्रम करने वालों और बुजुर्गों के फिंगरप्रिंट स्पष्ट नहीं होते, जिससे बायोमेट्रिक सत्यापन में समस्या आती है। इसके समाधान के लिए, सरकार ने वैकल्पिक सत्यापन विधियां जैसे आइरिस स्कैनिंग और फेस रिकग्निशन पेश की हैं।
चौथी चुनौती है गोपनीयता और डेटा सुरक्षा से संबंधित चिंताएं। ई-केवाईसी प्रक्रिया में व्यक्तिगत जानकारी और बायोमेट्रिक डेटा एकत्र किया जाता है, जिससे कुछ लोगों को गोपनीयता की चिंता होती है। इसके लिए, सरकार ने कड़े डेटा सुरक्षा उपाय लागू किए हैं और यह सुनिश्चित किया है कि एकत्र की गई जानकारी का उपयोग केवल उद्देश्य के अनुरूप ही किया जाए।